जब पहाड़ से उतर मैदान में अपना अाधार तैयार करने िनकले, तो उन्हें जबदॆस्त पऱितरोध का सामना करना पड़ा। अब उन्हें अाधुिनक हिथयारों की जरुरत थी और उसके िलए पैसा उगाहने की चुनौती भी। हिथयारों के िलए नक्सिलयों ने सबसे पहले लाइसेंसधारी िकसानों को टारगेट िकया। बजाप्ता पतर िलख उन्हें अपनी बंदूकें उनके पास जमा करने का फरमान जारी िकया। कुछ ने फरमान को माना और जो नहीं माने उनके हिथयार लूटे जाने लगे। अस्सी के मध्य में इस फरमान से एेसी िस्थित बनी िक लोग डर से अपने हिथयार बंदूक की दूकानं में जमा कराने लगे। यही वह दौर था जब नक्सली गुिरल्ला हमला कर पुिलस के हिथयार लूट की रणनीित पर अागे बढ़े। लेिकन उनकी हिथयार की जरुरत इससे पूरी नहीं हो पा रही थी। यहीं पर नक्सिलयों का जुड़ाव अवैध हिथयार सप्लायरों से हुअा। बीड़ी पत्ता और छोटे-मोटे ठेकेदारों से वसूली गयी लेवी की रािश इतनी बड़ी नहीं थी िक अाधुिनक हिथयारों की खेप खरीदी जा सके। ९० का दशक शुरू होते-होते नक्सिलयों ने अपने अाथॆक अधार को िवकास से जुड़ी योजनाअंो से लेवी लेने से जोड़ िदया। शुरुअाती िदक्कतों के बाद एेसी स्थिित बनी िक कोई भी छोटा-बड़ा ठेकेदार िबना लेवी िदये काम नहीं कर सकता था। जो नक्सिलयों से समझौता नहीं कर पाये वे काम भी नहीं कर पाये। अब नक्सिलयों के पास पयाॆप्त पैसा था। अाधुिनक हिथयारों और िवस्फोटकों का जखीरा था। पीठ पीछे से पुिलस पर हमला करने वाले नक्सली अामने-सामने की लड़ाई लड़ने लगे थे। लैंड माइंस िवस्फोट का घातक तरीका वे इजाद कर चुके थे। उनकी दहशत का अालम यह था िक पऱितरोध करनेवाली िकसानों की िनजी सेनाएं िबखर गयीं। अाम-अवाम उनके फरमान को अांख मूंद स्वीकारने लगा। नब्बे के मध्य से २००० के शुरुअाती िदनों तक अापस में लड़ने वाले एमसीसी और पीपुल्स वार में एका हो गया। इस मजॆर से एमसीसी एसीसीअाइ बन गया। अब वह अपना पैर पसार खिनजों का धंधा करनेवालों की नकेल कसने लगे। वििभन्न खदान मािलकों से लेवी की मोटी रकम नक्सिलयों के पास पहुंचने लगी। यहीं पर पैसे की भरमार ने नक्सिलयों को भी भऱिमत िकया। जंगल-पहाड़ों की कष्टमय िजंदगी शहरों की अारामदायक िजंदगी का सपना देखने लगी। भारी मातरा में अा रहे पैसे ने माअो और लेिनन को बेमतलब बताना शुरू कर िदया। सशस्तर कऱंित और दीघॆकालीन लोकयुद्ध का िसद्धांत दफन होने लगा। संगठन में िबखराव का बीजारोपण हो चुका था।
अगले अंक में पढ़े नक्सली संगठन में िबखराव की दास्तान

