रविवार, 23 नवंबर 2008

एेसे िबखर रहे हैं नक्सली

पैसा बना टूट का कारण
जो पैसा नक्सिलयों ने संगठन की मजबूती के िलए उगाहे थे, वही उनके िबखराव की कहानी बन रही है। अकूत पैसा नक्सिलयों के ली़डरिशप को जहां जंगल-पहाड़ की दुरूह िजंदगी से शहरों की सकून भरी िजंदगी की अोर अाकिषॆत िकया, वहीं िनचली कतार को असंतोष से भरने लगा। पैसा (लेवी) उगाही िनचली कतार के लोग ही करते रहे हैं। पैसा कोई मार नहीं ले इसके िलए नक्सली लीडर िनचली कतार पर पूरी नजर रखते हैं। लेवी के एक-एक पैसे पर नजर रखने के िलए वजाप्ता खाता-बही और रसीद के द्वारा लेन-देन की परम्परा नक्सली संगठन में शुरू से रही है। बहरहाल, जब नक्सिलयों के िनचली कतार ने देखा िक जान जोिखम में डाल पैसा वे उगाहते हैं और मजा लीडर मार रहे हैं, तो संगठन में खलबली मचने लगी। कई लीडरों के अावास जहां शहरों में बने, वहीं उनकी संताने भी शहर की नामी स्कूल-कॉलेजों में पढ़ने लगे। यह सब तो चल रहा था छुप-छुपाकर, लेिकन बात फैली और दूर तलक गयी। धीरे-धीरे िनचली कतार के नक्सिलयों द्वारा लेवी के पैसे मारने की घटनाएं होने लगीं। पकड़े जाने पर उन पर कड़ी कारॆवाई भी हुई। िनचली कतार को यह बात पूरी तरह समझ में अा गयी िक गड़बडी करने पर संगठन के िनयम के तहत उनकी जान भी जा सकती है। वे कारॆवाई के डर से संगठन भी नहीं छोड़ सकते थे। िदन-रात पुिलस से बचते-बचाते जंगल-पहाड़ की दुरूह िजंदगी जीनेवाले नक्सली जहां अपना जीवन बबॆाद कर चुके थे वहीं उनका पिरवार भी उनसे दूर हो चुका था। यह सब उन्हें लगातार कचोट रहा था। अाज से सात साल पहले इसी िवपिरत परिस्थित में एक एिरया कमांडर अपने पूरे हिथयारबंद दस्ते के साथ लेवी का लाखो रुपया लेकर संगठन से भाग गया। नक्सली संगठन ने उन्हें पकड़ सबक िसखाने की भरसक कोिशश की, लेिकन वे पकड़े नहीं गये। एक तो भगोड़े नक्सली रणनीित और उनकी गितिविधयों से वािकफ थे, वहीं कैसे अपनी सुरच्छा करनी है, यह भी वे अच्छी तरह जानते थे। धीरे-धीरे रािश के साथ संगठन से भागने का तांता ही लग गया। भगोड़े नक्सिलयों ने संगठन की कारॆवाई से बचने और अपना धंधा जमाने लगे। उन्हें पकड़ने की िजम्मेवारी संभालनेवाले िनचली कतार के लोग भी उनसे हद तक सहमित रखते थे, इसिलए भगोड़े पकड़े नहीं गये। हां कुछ मुठभेड़ें जरूर हुईं। अब नक्सली संगठन में िबखराव का िनयित बनने लगी। देखते-देखते यहां-वहां से पूरा का पूरा दस्ता लेवी की बड़ी रािश लेकर भागने लगा। एमसीसीअाइ के समानांतर संगठन खड़ा करने के िलए भगोड़े अापस में हाथ िमलाने लगे। ९० के दशक में एससीसी के जनमुिक्त मोचाॆ से अलग होकर बने संगठन संघषॆ जनमुिक्त मोचाॆ का उदाहरण उनके सामने था। इसे ही अपना अादशॆ मान भगोड़े भी वजाप्ता अपना संगठन खड़ा करने लगे। झारखंड पऱस्तुित कमेटी (जेपीसी), तृतीय पऱस्तुित कमेटी (टीपीसी), झारखंड िलबरेशन टाइगसॆ (जेएलटी) और पीपुल्स िलबरेशन फऱंट अॉफ इंिडया (पीएलएफअाइ) जैसे संगठन खड़े हो गये। पीपुल्स वार से हाथ िमलाने के बाद शिक्तशाली संगठन बना एमसीसीअाइ पूरी तरह िबखराव का गवाह बन गया।
अगले अंक में पढ़े िबखराव के बाद की कहानी
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