शनिवार, 29 नवंबर 2008

नक्सली सांसत में, पुिलस के मजे

िबना खून बहाये पकड़े जा रहे शीषॆ नक्सली
कहते हैं दुश्मन का दुश्मन दोस्त होता है। नक्सिलयों से अािजज अायी पुिलस ने जैसे ही देखा िक नक्सली संगठन टूट की अोर है, वैसे ही पुिलस ने भगोड़े नक्सिलयों से संपकॆ साधना शुरू कर िदया। अव्वल तो उसने भगोड़ों को अपना संगठन खड़ा करने में मदद की, वहीं उनकी सूचना पर एमसीसीअाई के नेटवकॆ को भी खंगालने लगी। कल तक नक्सियों की एक भी सूचना पाने में िवफल रहनेवाली पुिलस के पास सूचनाअों का अंबार लग गया। जंगल-पहाड़ों पर अब मुठभेड़ की कहानी भी बदलने लगी। पहले जहां पुिलस लड़ती थी, वहां अब दोस्त से दुश्मन बने भगोड़े नक्सली िभड़ने लगे। िपछले दो वषॆ से िबहार-झारखंड के इलाके में शायद ही कोई िदन एेसा गुजरता है िजस िदन नक्सली और भगोड़े नक्सली नहीं िभड़ते। इससे पुिलस का काम हद तक अासान हो गया है। ९० के दशक में भी पुिलस के सामने एेसी ही िस्थित थी, जब एमसीसी और पाटीॆ यूिनटी िरटेन और िरगेन की लड़ाई लड़ती थी। पुिलस िसफॆ घटनास्थल से लाशें उठाती थी। वैसी ही िस्थित अाज है। पुिलस के पास न िसफॆ नक्सिलयों से जुड़ी सूचनाअों का अावक बढ़ा है, बिल्क उनके सही औकात का भी पता चल रहा है। यह सटीक सूचना भगोड़े नक्सली ही पुिलस तक पहुंचा रहे हैं। उसका ही पिरणाम है िक थोक में नक्सली पकड़े जा रहे हैं। वह भी िबना खून बहाये। गुमला, पलामू, गढ़वा और हजारीबाग में िसफॆ १५ िदन के भीतर नक्सिलयों के जोनल कमांडर, सब जोनल कमांडर से लेकर अनेक एिरया कमांडर तक पकड़े गये हैं। पहले एक एिरया कमांडर का पकड़ा जाना बड़ी खबर होती थी, लेिकन अाज जोनल कमांडर के पकड़े जाने पर भी सनसनी नहीं होती। अखबार भी अब इस सूचना को पहले पन्ने की जगह भीतर के पन्नों पर जगह देते हैं। यह सब हुअा है नक्सिलयों में िबखराव से। अगर यही िस्थित रही और पुिलस ने इसका पूरा फायदा उठाया, तो नक्सली बीते िदनों की कहानी बन कर रह जायेंगे।
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