मंगलवार, 3 मार्च 2009

नक्सिलयों की रीित-नीित और उद्देश्य-१

पहला चरण-शुरू करना और जारी रखाना

दीघॆकालीन जनयुद्ध के मंतर के साथ सशस्तर कऱांित की राह पर चलना शुरू करने और मुकाम की अोर बढ़ने का नक्सिलयों का एक सुिनयोिजत कायॆकऱम होता है। पहला कदम शुरू करना और जारी रखना होता है। दूसरा चरण गुिरल्ला युद्ध का योजनाबद्ध िवकास तथा तीसरा कायॆकऱम पऱभाव, सबक और उसके अाधार पर भावी कायॆनीित का होता है।नेपाल की कम्युिनस्ट पाटीॆ (माअोवादी) की केंदऱीय कमेटी के अंगऱेजी मुख्य पतर द वक्सॆ के अनुसार नक्सली लच्छय की पहली कायॆयोजना शुरू करना और जारी रखना के िलए माकूल स्थान और पिरवेश के चुनाव का होता है। साथ ही यह ध्यान रखा जाता है िक दीघॆकालीन लोकयुद्ध के िलए वहां तीन राजनीितक चरणों को पूरा करने का अवसर हो। मसलन रणनीितक रच्छा, रणनीितक अाकऱमण और रणनीितक अवरोध के िलए जनसहयोग की िस्थित उपलब्ध हो। इसके िलए सवॆहारा बहुल इलाका ज्यादा माकूल बैठता है। इसके पीछे यह तकॆ होता है िक िजनके पास खोने को बहुत कुछ नहीं होता, वही कुछ भी कर गुजरने का साहस रख सकता है। दीघॆकालीन लोकयुद्ध की पहली सीढ़ी रणनीितक रच्छा में भी अनेक कायॆनीितक चरण होते हैं। इसमें मुख्यतः शुरूअात की अंितम तैयारी, गुिरल्ला जोनों का िनमाॆण तथा अाधार इलाके का िनमाॆण शािमल होते हैं। पहली योजना का मूल मकसद जनयुद्ध की िदशा में व्यावहािरक पहल लेना, राजसत्ता पर कब्जा करने के िलए सशस्तर कऱांित की राजनीित से अाम अावाम के िविभन्न िहस्से को जोड़ना, संगठन के मुख्य स्वरूप के तौर पर जनसेना (पीपुल्स अामीॆ) का गठन तथा संघषॆ को धार देने के िलए सशस्तर गितिविधयों को चलाने की पऱिकऱया को शुरू करना होता है। िवदऱोह करना एक मौिलक अिधकार है के में िवश्वास करते हुए व्यवस्था की खािमयों को को अागे कर व्यवस्था और राजसत्ता के िखलाफ जनता को वदऱोह करने के िलए संगिठत करना नक्सली अांदोलन की राह पर रखा गया पहला कदम होता है। शुरू में भौितक उपलिब्धयों पर ज्यादा जोर नहीं होता। िसफॆ यह ध्यान रखा जाता है िक लोगों में उनका राजनीितक संदेश जाये और अिधकतम राजनीितक पऱचार हो। लेिकन व्यावहािरक रूप में जनयुद्ध की शुरूअात व्यवस्था के पऱतीक पुिलस चौकी, सामंत, सरकारी भवन और िहस्टरीशीटरों अािद पर सटीक ढंग से अाकऱमण के रूप में जनयुद्ध की शुरूअात का उदघोष िकया जाता है। इसे लगातार िकया जाता है तािक ज्यादा से ज्यादा पऱचार िमले और उनकी सैन्य औकात का भी खुलासा हो सके। यह समय नक्सली अांदोलन का पऱचारात्मक दौर भी होता है। साथ ही इसकी पूरी कोिशश होती है िक मीिडया जनयुद्ध के भूत को जानने-समझने को उत्सुक हो। इस योजना के उपर कदमता करते हुए नक्सली अांदोलन खुद को इस तेवर में लाता है िक राजनीितक शिक्तयां और राजनीितक मानस की यह बाध्यता बने िक वे नक्सली राजनीित के रू-ब-रू होकर अपनी राय बनाये। इस कायॆयोजना का बुिनयादी मकसद पूरा होने के बाद एक नयी कायॆयोजना शुरू की जाती है। इसमें अाकऱमक कारॆवाइयों को रोकना और रच्छात्मक कारॆवाइयों को जारी रखने की रणनीित अपनायी जाती है।


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एक महत्वपूणॆ पड़ाव होता है नक्सली अाकऱमण पर रोक की रणनीित

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