रलच्छय संधान के िलए अनुमािनत समयसीमा का सहारा लेते हैं नक्सली
नक्सिलयों की दूसरी योजना गुिरल्ला युद्ध का योजनाबद्ध िवकास का मूल मकसद िनकट भिवष्य में खास इलाकों को गुिरल्ला जोन में तब्दील करने करने के िलए अाधार तैयार करना होता है। इसके तहत िविशष्ट इलाके में हिथयारबंद जनाधार बनाने के िलए सैन्य टुकिड़यों की लड़ाकू छमता को उन्नत बनाने और फैलाने पर िवशेष ध्यान िदया जाता है। यही वो समय होता है जब नक्सली रणनीितकार अाधार इलाके में पऱधान जोन, गौण जोन और पऱोपेगंडा जोन में अंचलों को वगीॆकृत करने तथा उसे िचिहनत करने की नीित पर अमल शुरू करते हैं। पहली योजना की तरह ही दूसरी योजना को शुरू करने के पहले छोटी अविध तक तैयारी का काम चलाया जाता है। साथ ही यह मान कर चला जाता है िक नक्सली लच्छय और उसे पऱाप्त करने की पऱकृित को देखते हुए इसके िलए कोई िनयत समय सीमा िनधाॆिरत नहीं िकया जा सकता। इसिलए अनुमािनत समयसीमा को ध्यान में रखते हुए इसके अागे के िलए भी नक्सली तैयारी बनाये रखने की रणनीित अपनायी जाती है। नक्सली रणनीितकारों का यह भी मानना है िक शुरुअाती दौर में दुश्मनों (राजसत्ता) को सुराग िमलने से उन्हें झटका लगने की स्थिित रहती है। इसे ध्यान में रखते हुए योजना के महत्वपूणॆ तत्वों में अांिशक बदलाव लाने की नीित भी साथ-साथ चलती रहती है। इसी दूसरे दौर की नक्सली कायॆयोजना में ही बड़ी नक्सली कारॆवाइयों को अमली जामा पहनाया जाता है। इसमें दुस्साहिसक सैन्य कारॆवाइयों के जिरये छापामार िविध से पुिलस और दबंग लोगों के हिथयार जब्त िकये जाते हैं और उस हिथयार से खुद को ज्यादा अाकऱामक बनाया जाता है। इस योजना के अविध के दौरान स्थानीय जीिलमों, मुखिबरों और अातंक के पयाॆय बन चुके िचिह्नत पुिलसकिमॆयों में से कुछ को चुनकर खात्मा िकया जाता है। साथ ही घटनास्थल पर परचा छोड़ खात्मा की वजह का खुलासा िकया जाता है। सैन्य कारॆवाइ के साथ जनगोलबंदी और पऱचारात्मक उद्देश्यों पर भी ध्यान रखा जाता है। इसके तहत खुले और गुप्त तरीके से रजनीितक, अािछॆक, सामािजक और सांस्कृितक गितिवििधयां बड़े पैमाने पर चलायी जाती हैं। दूसरी योजना के तहत नरसंहार, पुिलस और सामंतों पर हमले की पऱितिकऱयास्वरूप राजसत्ता ज्यादा कठोर और पऱितशोध की भावना से कारॆवाई करता है। इससे नरसंहारों और हमलों की घटनाएं कई गुणा बढ़ जाती हैं। पुिलिसया अॉपरेशन बड़े पैमाने पर शुरू होता है। इस िस्थित में नक्सली पूवॆ िनधाॆिरत रणनीित गुिरल्ला युद्ध के तहत बचाव और अाकऱमण करते हैं। वहीं िविभन्न वगोॆ को गोलवंद करने के िलए कई फऱंट नक्सली िहत में कानूनी और मानवािधकार के मसले को उठाते रहते हैं। िवशेषकर शहरी इलाके में कऱांितकारी राजनीित के पऱचार-पऱसार और पऱितिकऱयावादी राजसत्ता की जनिवरोधी कारॆवाइयों को पऱचािरत करने पर िवशेष जोर िदया जाता है।
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तीसरा लच्छय सामानांतर सरकार का होता है