बुधवार, 3 सितंबर 2008
नक्सली जनअदालत में
नक्सली सुपऱीमों पर गऱामीणों ने लगाया अारोप चुनाव लड़नेवाले अारोिपयों को थूक कर चटाया गया खबर अायी सागर चटजीॆ ११ सािथयों सिहत मारे गये हम पतरकार नक्सली सुपऱीमों सागर चटजीॆ के सामने खड़े थे। उन्होंने कुताॆ और लखनऊअा पैजामा पहन रखा था। कद िठगना था। शरीर गठीला था। हाथ में िसगरेट सुलग रही थी। उनसे हमारा पिरचय कराया गया। बांग्ला टोन की िहन्दी में उन्होंने यहां तक अाने में हुई परेशानी के बाबत पूछा और कुछ देर बाद बातचीत की बात कही। हमलोग एक बांध की तलहटी में सैकड़ों गऱामीणों के बीच बैठे थे। पता चला की हमलोग नक्सली जनअदालत में हैं। सामने दो लोग िसर झुकाये बैठे थे। दोनों मुजिरम थे। इनपर नक्सली िवरोध के बाद भी िवधानसभा चुनाव लड़ने का अारोप था। जनअदालत की कारॆवाही शुरू हुई और सबसे पहले अारोप पढ़कर सुनाया गया। उसके बाद दोनों को अपनी बात कहने का मौका िदया गया। वे अारोप के बाबत कुछ कहते इसके पहले ही गऱामीणों का एक दल मुखर हो गया। वह हमें जनअदालत तक ले जानेवाले िवजय अायाॆ के िपता पर पहले कारॆवाई करने की मांग करने लगे। अायाॆ के िपता भी ढोलक छाप पर चुनाव लड़े थे। मामला तूल पकड़ने लगा। गऱामीणों की गोलबंदी के अागे नक्सली सुपऱीमों भी सकते में थे। उन्होंने कहा-अगर गऱामीण नक्सिलयों पर अारोप लगाते हैं,तो उसके िलए अलग से जनअदालत लगायी जायेगी और वे खुद उसमें मौजूद रहेंगे। जनअदालत में पकड़ कर लाये गये दोनों अारोिपयों ने गलती स्वीकार कर ली। दोनों अारोिपयों को दस-दस लाठी मारने की सजा दी गयी थी। सजा के िवंदू पर एकबार िफर िवरोध के स्वर फूटे। िस्थित की नजाकत को भांप सजा तय करने के िलए पांच लोगों की कमेटी बनायी गयी। कमेटी सदस्य वहां से थोड़ी दूर हटकर बैठे। लौटकर थूक कर चाटने की सजा देने की बात कही। अारोिपयों ने वैसा ही िकया। तबतक सुबह के चार बज चुके थे। हमलोग सागर चटजीॆ के चारमीनार िसगरेट की पूरी िडब्बी फूंक चुके थे। गमछे में बंधी रोटी-प्याज को नमक और िमचॆ के साथ चट कर चुके थे। नक्सली सुपऱीमों से िमलने के बाद भी उनका इंटरव्यू समय की कमी के कारण हम नहीं कर पाये। बस चलते-चलते कुछ छोटी-मोटी बात ही हो सकी। उन्होंने जल्द ही िफर िमलने की बात कही। हम सभी एक छोटे से नक्सली दस्ते के साथ वापस लौट गये। सागर चटजीॆ जनअदालत स्थल से ही कही और चले गये। उनसे िमलने के दो सप्ताह बाद ही खबर अायी की नक्सली सुपऱीमों अपने ११ सािथयों के साथ औरंगाबाद िजले के मथानिबगहा गांव में पुिलस मुठभेड़ में मारे गये। उन्हें तत्कालीन एसपी अिनल पाल्टा की टीम ने ढेर िकया था। पाल्टा अभी झारखंड में डीअाइजी हैं।
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