बुधवार, 3 सितंबर 2008

एेसे पहुंचा नक्सली सुपऱीमों तक

िपछली बार की तरह नक्सिलयों का हिथयारबंद दस्ता रात ११ बजे अाया और हम सत्तू पीकर उनके साथ हो िलये। अायाॆ ने बताया िक चार-पांच घंटे पैदल चलना होगा। यह सुन िवजय नारायण ने अायाॆ से कहा-िसफॆ सत्तू पीकर संजय नहीं चल पायेंगे। कुछ खाने को ले लें। गमछा में रोटी,प्याज और िमचॆ बांध घनघोर काली रात में हमारी यातरा शुरू हुई। नक्सली दस्ते ने हमें एक कतार में अागे-पीछे कर लाइन बना िदया था इस चेतावनी के साथ िक कोई बातचीत नहीं करेगा। मािचस-टाचॆ नहीं जलाये जायेंगे। दो-तीन िकलोमीटर जाने के बाद एक हिथयारबंद नक्सली बगल से दौड़ता हुअा,मदन िशकारी एक-मदन िशकारी एक दुहराता िनकला। िवजय अायाॆ ने बताया िक मदन िशकारी एक अाज का हमारा कोड वडॆ है। इसी से दोस्त-दुश्मन की पहचान होगी। उन्होंने इसे याद रखने की िहदायत दी। कुछ दूर जाने के बाद हम एक गांव के पास पहुंचे। वहां हमें रुकने को कहा गया। नक्सिलयों ने िसयार की अावाज िनकाली। गांव की ्ोर से भी वही अावाज अायी। थोड़ी देर बाद २०-२५ लोग हमारे कािफले में शािमल हो गये। यह िसलिसला चार-पांच गांवों के करीब चला,लोग जुड़ते गये और कारवां बढ़ता रहा। खेतों की पगडंिडयों पर लुढ़कते-उठते,नदी-नालों को पार करते,जंगल-पहाड़ की कटीली-पथरीली मागोॆ से गुजरते कारवां एक सूखे अाहर पर पहुंचा। हमें वहां रोक िदया गया। एक अावाज िनकाली गयी। दूसरी अोर से भी वही अावाज अायी। थोड़ी देर बाद कुछ हिथयारबंद लोग अाये और रास्ता साफ होने का संदेश िमलने पर िफर कारवां चल पड़ा। एक-एक िकलोमीटर के फासले पर हमें इसी तरह रोक कर तीन बार पऱिकऱया दुहरायी गयी। नक्सली िवजय अायाॆ ने बताया िक तीन स्तरीय सुरच्छा होती है हमारी। सुपऱीमों तक पहुंचने के पहले दुशमनों (पुिलस)को रोकने के िलए एेसा िकया जाता है। अंततः हम नक्सली सुपऱीमों सागर चटजीॆ के सामने थे। रात के ढाई बज रहे थे।

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