माअो-लेिनन की बात करनेवाले नक्सली अाज लंपट हो गये हैं। अपने-अपने इलाके में इनके सशस्तर दस्ते गुंडा िगरोह बन गये हैं। लेवी के नाम पर इनकी गुंडई का अालम यह है िक छोटा-बड़ा कोई भी िवकास का काम िबना इनको चढ़ावा चढ़ाये शुरू नहीं हो सकता। एक िदन पहले ७४ करोड़ से बननेवाली डालटनगंज-पांकी सड़क का काम रोक िदया है नक्सिलयों ने । यह एक एेसी सड़क है,िजसे लेकर असेॆ से लोग अांदोिलत थे। बीच में लोगों ने सरकार का भरोसा छोड़ श्रमदान से सड़क िनमाॆण का बीड़ा उठाया था।
यह एक बानगी है नक्सिलयों की गुंडई की। इनकी करस्तािनयों की फेहिरश्त इतनी लंबी है िक पूरी पुस्तक बन जाये। गरीबों के िहत की बात करनेवाले ये लंपट गरीबों को कैसे सताते हैं,इसका उदाहरण इनके पऱभाव वाले इलाके के हर गांव में िमलेंगे। िजस गांव में ये रात का पड़ाव डालते हैं,वहां के लोग इनके खाने-पीने का पऱबंध तो करते ही हैं,नक्सली इनकी बहू-बेिटयों को भी नहीं छोड़ते। उनके मुगाॆ-मुगीॆ और बकरे पर तो हाथ साफ करते ही हैं।नक्सली दस्ते में एेसी कई लड़िकयां हैं,जो उनकी हवस का िशकार बनने के बाद सामािजक पऱताड़ना सहने की जगह उनलोगों के साथ ही जुड़ जाना बेहतर समझा है। पुिलस की पकड़ में अाने के बाद जब ये लड़िकयां अपनी राम कहानी सुनाती हैं,तो नक्सिलयों का असली चेहरा सामने अा जाता है।
एक अोर पूरे देश में बच्चों को स्कूल से जोड़ने का अिभयान चल रहा है,दूसरी अोर नक्सली इन बच्चों-िकशोरों को हिथयार थमा अपने दस्ते में शािमल कर रहे हैं। झारखंड के लातेहार िजला के बालूमाथ पऱखंड के कई गांव इसके गवाह हैं। यहां के िकशोरों को वजाप्ता ८०० रुपये की सैलरी दी जाती है।
नक्सिलयों के संगठन में लंपटई को लेकर कई बार गंभीर मंथन भी हुअा है,लेिकन इनका साधन ही एेसा है िक साध्य भटक जाता है। अब तो हालत यह है िक संगठन ही िबखराव के दौर में है। लेवी का भारी धन और हिथयार लेकर पूरा का पूरा दस्ता भाग रहा है। एसे लोग नक्सिलयों के अाधार इलाके में अब अपना संगठन बना वजाप्ता लेवी वसूल रहे हैं। नक्सिलयों से अामने-सामने की लड़ाई में मुकाबला कर रहे हैं। पुिलस की भूिमका भी हद तक इनकी पॐधरता की है। इसी के साथ गऱामीणों की शामत भी अा गयी है। दोनों संगठन गऱामीणों को एक-दूसरे को पनाह नहीं देने की धमकी दे रहे हैं। कई जगह इसी अारोप में गऱामीणों की िपटाई भी की गयी है। तो यह है कल के गरीबों के रहनुमा की अाज की हकीकत।
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